परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट (परपेचुअल फ्यूचर्स) क्या हैं

परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट क्रिप्टो में सबसे ज़्यादा ट्रेड होने वाले प्रोडक्ट में से एक है। इससे आप लीवरेज के साथ किसी कॉइन के बढ़ने या गिरने पर दांव लगा सकते हैं, और इसकी कोई समाप्ति तिथि नहीं होती। इसे समझना फ्यूचर्स की हर रणनीति का पहला कदम है, आर्बिट्राज का भी।
समाप्ति वाले फ्यूचर्स और परपेचुअल फ्यूचर्स
पारंपरिक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की एक समाप्ति तिथि होती है। तय तारीख पर वह सेटल हो जाता है और उसकी कीमत हाज़िर (स्पॉट) कीमत के बराबर आ जाती है। परपेचुअल की समाप्ति नहीं होती: जब तक मार्जिन है, आप पोज़िशन जितने समय चाहें खुली रख सकते हैं।
समाप्ति न होने से एक समस्या बनती है: परपेचुअल की कीमत को कॉइन की असली कीमत से दूर जाने से कौन रोकता है? जवाब है फंडिंग, खरीदने वालों और बेचने वालों के बीच समय-समय पर होने वाला भुगतान।
फंडिंग कीमत को कैसे संतुलित रखती है
जब परपेचुअल की कीमत स्पॉट कीमत से ज़्यादा होती है, तो फंडिंग आम तौर पर पॉज़िटिव होती है: लॉन्ग वाला शॉर्ट वाले को भुगतान करता है। इससे खरीदने की इच्छा घटती है, बेचने की बढ़ती है, और कीमत वापस नीचे आती है। जब कीमत कम होती है, तो उल्टा होता है।
फंडिंग इसीलिए है, और फंडिंग आर्बिट्राज की कमाई इसी से आती है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें फंडिंग रेट क्या है।
ज़रूरी विशेषताएं
- लीवरेज: आप जमा की गई पूंजी से बड़ी पोज़िशन संभालते हैं। देखें लीवरेज क्या है।
- मार्जिन: पोज़िशन को टिकाए रखने के लिए अलग रखी गई रकम, आइसोलेटेड या क्रॉस मोड में।
- लिक्विडेशन: अगर घाटा मार्जिन को खा जाए, तो एक्सचेंज पोज़िशन ज़बरदस्ती बंद कर देता है।
- खरीद और बिक्री: तेज़ी (लॉन्ग) और गिरावट (शॉर्ट) दोनों में कमाई संभव है।
परपेचुअल और आर्बिट्राज
परपेचुअल में कॉइन अपने पास रखे बिना शॉर्ट हुआ जा सकता है, इसलिए यह अलग-अलग एक्सचेंज में दो विपरीत पोज़िशन बनाने का आदर्श साधन है। एक लॉन्ग, दूसरी शॉर्ट, बराबर रकम के साथ। कीमत के बदलाव एक-दूसरे को काट देते हैं और फंडिंग बचती है।
हर तरफ़ की अपनी लिक्विडेशन कीमत होती है। हेज होने पर भी, अगर कीमत किसी एक तरफ़ के खिलाफ़ बहुत चली जाए, तो ट्रेड को नुकसान हो सकता है। देखें लिक्विडेशन से कैसे बचें।
एक सरल उदाहरण
आपको लगता है कि BTC बढ़ेगा और आप 5x लीवरेज के साथ, $200 मार्जिन लगाकर, परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट में $1,000 का लॉन्ग खोलते हैं। अगर BTC 3% बढ़ता है, तो पोज़िशन को लगभग $30 का फ़ायदा होता है। अगर 3% गिरता है, तो लगभग $30 का नुकसान। जब तक पोज़िशन खुली है, आप हर अंतराल पर फंडिंग देते या पाते हैं।
अगर फंडिंग पॉज़िटिव है, तो लॉन्ग होने के नाते आप देते हैं। बहुत जोश वाले दिनों में यह लागत काफ़ी जुड़ सकती है। लंबे समय तक दिशा पर ट्रेड करना महंगा पड़ने की यह भी एक वजह है।
परपेचुअल, स्पॉट और समाप्ति वाले फ्यूचर्स: सार
| स्पॉट | समाप्ति वाला फ्यूचर्स | परपेचुअल | |
|---|---|---|---|
| कॉइन के मालिक | हां | नहीं | नहीं |
| लीवरेज | नहीं | हां | हां |
| समाप्ति | नहीं | हां | नहीं |
| फंडिंग | नहीं | नहीं | हां |
| शॉर्ट हो सकते हैं | सिर्फ़ उधार लेकर | हां | हां |
संबंधित गाइड: फंडिंग रेट क्या है। सभी क्रिप्टो आर्बिट्राज गाइड भी देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या परपेचुअल और फ्यूचर्स एक ही चीज़ हैं?
ये मिलते-जुलते हैं, लेकिन पारंपरिक फ्यूचर्स की समाप्ति होती है और परपेचुअल की नहीं। परपेचुअल कीमत को कॉइन की कीमत के करीब रखने के लिए फंडिंग का इस्तेमाल करता है।
फंडिंग कौन देता है?
आम तौर पर, जब फंडिंग पॉज़िटिव होती है, तो लॉन्ग वाला शॉर्ट वाले को देता है। नेगेटिव होने पर उल्टा होता है।
क्या परपेचुअल को रखने की कोई लागत है?
हां: ट्रेडिंग शुल्क और फंडिंग, जो पोज़िशन के पक्ष के हिसाब से दी या पाई जा सकती है।
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2 मिनट में पढ़ेंयह सामग्री सिर्फ़ जानकारी के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है। क्रिप्टो डेरिवेटिव में ट्रेडिंग में बहुत ज़्यादा जोखिम होता है, जिसमें पूरी पूंजी डूब जाने का जोखिम भी शामिल है। पिछले नतीजे भविष्य के नतीजों की गारंटी नहीं देते और यहां बताई गई रकमें उदाहरण हैं। ट्रेडिंग शुरू करने से पहले जांच लें कि आपके देश में क्रिप्टो डेरिवेटिव की ट्रेडिंग की अनुमति है या नहीं और टैक्स से जुड़ी आपकी ज़िम्मेदारियां क्या हैं। निवेश करने से पहले यह भी परखें कि यह प्रोडक्ट आपकी ज़रूरत और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुकूल है या नहीं।